- नमाजियों की संख्या तय करने का अधिकार प्रशासन को नहीं
- निजी परिसर में नमाज़ के लिए सरकारी अनुमति की ज़रूरत नहीं
देहरादून. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने को लेकर प्रशासन पर तीखा और असहज कर देने वाला प्रहार किया है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि मस्जिद में कितने लोग नमाज पढ़ेंगे, यह तय करने का अधिकार प्रशासन को बिल्कुल नहीं है।
खंडपीठ ने साफ शब्दों में चेताया कि अगर संभल के डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके विश्नोई को लगता है कि वे हालात नहीं संभाल सकते, तो या तो इस्तीफा दें या ट्रांसफर करवा लें। कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी ड्यूटी है, कोई “विकल्प” नहीं।
यह सख्त टिप्पणी जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने की।
कोर्ट का तल्ख संदेश

कोर्ट ने स्पष्ट कहा .राज्य का काम यह सुनिश्चित करना है कि हर समुदाय अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांति से पूजा कर सके। निजी संपत्ति में पूजा के लिए राज्य से किसी अनुमति की जरूरत नहीं। कानून-व्यवस्था का बहाना बनाकर मौलिक अधिकारों को कुचलना स्वीकार्य नहीं है।
प्रशासन की दलील पर करारा तमाचा
याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने मस्जिद पहुंचकर फरमान जारी किया—एक बार में सिर्फ 20 लोग, वह भी 5–6 के समूह में नमाज पढ़ेंगे।
सरकारी वकील ने इसे “कानून-व्यवस्था” का मामला बताने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को सीधे-सीधे खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून-व्यवस्था संभालना प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि धार्मिक अधिकारों पर कैंची चलाना।
रमजान में नमाज रोकने पर नाराजगी
याचिकाकर्ता ने बताया कि रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज से रोका जा रहा है, जबकि इस पाक महीने में स्वाभाविक रूप से भीड़ बढ़ती है। कोर्ट ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक मस्जिद या नमाज स्थल से जुड़ा कोई ठोस रिकॉर्ड या तस्वीर पेश नहीं की गई।
हालांकि, याचिकाकर्ता को 16 मार्च से पहले तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड दाखिल करने की अनुमति दी गई है।
बरेली मामला: अफसरों को सीधे कटघरे में खड़ा कियाबरेली मामला: अफसरों को सीधे कटघरे में खड़ा किया
इसी तरह के एक अन्य मामले में, बरेली में घर के अंदर नमाज अदा करने से रोकने पर हाईकोर्ट पहले ही डीएम और एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से तलब कर चुका है। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी थी कि गैरहाजिरी पर गैर-जमानती वारंट जारी होगा।इतना ही नहीं, याची को 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा देने का आदेश भी दिया गया।
बरेली निवासी तारिक खान ने आरोप लगाया था कि उनके निजी घर में नमाज से रोकना, हाईकोर्ट के पुराने आदेश की खुली अवहेलना है। कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि निजी परिसर में प्रार्थना के लिए प्रशासन की कोई भूमिका नहीं होती।
हाईकोर्ट का रुख अब बिल्कुल साफ है. धार्मिक स्वतंत्रता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।कानून-व्यवस्था के नाम पर अधिकारों का गला घोंटा गया, तो जिम्मेदार अफसरों को सीधे कटघरे में खड़ा किया जाएगा।

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