देहरादून: राजधानी देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में लंबे समय से विवादों और कथित गुंडागर्दी के केंद्र बने बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर आखिरकार प्रशासन ने बड़ा और निर्णायक प्रहार किया है। लगातार मिल रही शिकायतों, बढ़ती आपराधिक घटनाओं और स्थानीय निवासियों में भय के माहौल को गंभीरता से लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है।
डीएम कोर्ट ने आरोपी बिल्डर को गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी करते हुए 7 दिन के भीतर संतोषजनक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा में जवाब नहीं दिया गया या जवाब असंतोषजनक पाया गया, तो उसके खिलाफ जिला बदर (एक्सटर्नमेंट) की सख्त कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
यह कार्रवाई प्रशासन के उस सख्त रुख को दर्शाती है जिसमें साफ संकेत दिया गया है कि “दबंगई और कानून हाथ में लेने वालों के लिए अब देहरादून में कोई जगह नहीं है।”
नाबालिगों पर पिस्टल तानने से लेकर जमीन कब्जाने तक—आरोपों की लंबी फेहरिस्त
पुनीत अग्रवाल का नाम पहली बार विवादों में नहीं आया है। इससे पहले दीपावली के दौरान नाबालिग बच्चों के सामने पिस्टल लहराने और लाइसेंसी हथियार का दुरुपयोग करने का मामला सामने आया था। इस गंभीर कृत्य पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए न सिर्फ शस्त्र जब्त किया, बल्कि लाइसेंस भी निलंबित कर दिया था।
इसके अलावा आरोपी पर—
- डीआरडीओ वैज्ञानिक से मारपीट
- नशे में धुत होकर आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों से अभद्र व्यवहार
- बच्चों से गाली-गलौज और डराने-धमकाने
- गाड़ी से टक्कर मारने का प्रयास
- जनरल बॉडी मीटिंग में खुलेआम धमकियां
- झूठे मुकदमों में फंसाकर उत्पीड़न
- कूट रचित रजिस्ट्री के जरिए विधवा महिला की जमीन पर कब्जा
जैसे संगीन आरोप दर्ज हैं।
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 351(2), 352, 74, 126(2), 324(4) और 447 के तहत कुल 5 मुकदमे दर्ज हैं, जो उसके आपराधिक रवैये और कानून के प्रति बेखौफ मानसिकता को उजागर करते हैं।
डीआरडीओ वैज्ञानिक पर हमला: “दबंगई की हद पार”
ताजा मामला उस वक्त सामने आया जब नगर निगम/एमडीडीए की जमीन पर कथित अवैध निर्माण का विरोध करने पर डीआरडीओ के वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि निर्माण का मलबा उनके घर की ओर गिर रहा था और विरोध करने पर बिल्डर ने पहले गाली-गलौज की, फिर हाथापाई पर उतर आया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला और थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले भी कई शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आरोपी के हौसले बुलंद होते गए।
प्रशासन का कड़ा संदेश: “अब नहीं चलेगी दबंगई”
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट और सख्त शब्दों में कहा है कि जनसुरक्षा सर्वोपरि है और महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों व कमजोर वर्गों के साथ किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे तत्वों के खिलाफ बिना किसी दबाव या पक्षपात के कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जनता में राहत, आरोपी पर शिकंजा
डीएम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर की गई यह कार्रवाई न केवल पीड़ितों के लिए राहत की खबर है, बल्कि शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन की गंभीरता को भी दर्शाती है। लगातार विवादों, बढ़ती शिकायतों और जनसुरक्षा पर खतरे को देखते हुए अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि यदि आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, तो उसे जल्द ही देहरादून जिले से बाहर कर दिया जाएगा। देहरादून में अब “दबंग बिल्डर” या किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति की मनमानी नहीं चलेगी—कानून का डंडा हर उस व्यक्ति पर चलेगा जो आम जनता की सुरक्षा और सम्मान के साथ खिलवाड़ करेगा।
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