डॉ. अंकुर पांडेय: जिन्होंने 10 साल तक बचाईं हजारों जानें, ब्रेन स्ट्रोक से जंग हार गए; चिकित्सा जगत स्तब्ध

  • उत्तराखंड की जनता के लिए ये बहुत बड़ा झटका 
  •  मिलनशार इतने कि शायद ही अभी तक कोई डॉक्टर हो

देहरादून (न्यूज डेस्क): मरीजों की नब्ज टटोलकर उन्हें नया जीवन देने वाले दून मेडिकल कॉलेज के मशहूर वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अंकुर पांडेय अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार शाम करीब 4:30 बजे मैक्स अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। महज कुछ दिनों पहले तक जो डॉक्टर अस्पताल के वार्डों में मरीजों को ठीक कर रहे थे, वे खुद वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। उनके जाने से पूरे उत्तराखंड के चिकित्सा क्षेत्र में गहरा सन्नाटा पसर गया है।

## अचानक लगे ‘ब्रेन स्ट्रोक’ ने छीन लिया एक बेहतरीन डॉक्टर

यह दुखद सिलसिला 28 जुलाई को शुरू हुआ, जब डॉ. अंकुर अपने सरकारी आवास में अचानक बेहोश पाए गए। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें गंभीर ‘ब्रेन स्ट्रोक’ आया है। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत मैक्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने उनकी सर्जरी भी की। सर्जरी के बाद से ही उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने भारी मन से इस खबर की पुष्टि की।

 प्रयागराज से देहरादून तक का सफर: याद आएंगे डॉ. अंकुर

* 10 वर्षों का अटूट रिश्ता: मूल रूप से प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले डॉ. अंकुर पिछले एक दशक से दून मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रहे थे।

* संवेदनशील और मिलनसार व्यक्तित्व: अस्पताल के स्टाफ और सहकर्मियों के मुताबिक, वे सिर्फ एक डॉक्टर नहीं बल्कि बेहद सरल और हर दिल अजीज इंसान थे।

* अधूरी रह गई नई शुरुआत: डॉ. अंकुर का विवाह हाल ही में हुआ था। किसी ने नहीं सोचा था कि खुशियों से भरे इस नए सफर का अंत इतनी जल्दी और इतना दर्दनाक होगा।

चिकित्सा जगत ने उनके निधन को एक ‘अपूरणीय क्षति’ (ऐसी कमी जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता) बताया है। डॉ. अंकुर पांडेय को उनकी निस्वार्थ सेवा और मुस्कुराते चेहरे के लिए हमेशा याद रखा जाएगा.

 

 

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