जब मासूमियत ने लिया आध्यात्म का रूप – देहरादून में बाल संत समागम की अनूठी छटा

देहरादून| जहां दुनिया तेज़ी से विज्ञान और तकनीक की ओर भाग रही है, वहीं देहरादून के निरंकारी सत्संग भवन में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने साबित किया कि आधुनिकता और अध्यात्म एक साथ चल सकते हैं।

यह मौका था बाल संत समागम का — जहाँ बच्चों ने अपने भोलपन में ज्ञान, श्रद्धा और प्रेम की ऐसी मिसाल पेश की कि हर आंखें नम और हर दिल प्रभावित हो उठा। दिल्ली से पधारे श्रद्धेय श्री प्रदीप अरोड़ा जी ने जब सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का संदेश सुनाया, तो शब्द नहीं, संवेदनाएँ बोल उठीं। उन्होंने कहा,

“आज का यह समागम केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर अध्यात्म के बीज बोने का शुभ आरंभ है — जो उन्हें गलत राहों से बचाकर सेवा, संयम और श्रद्धा की राह पर आगे बढ़ाता है।”

बच्चों ने मंच पर आकर कलाकृतियों, कविताओं, अभिनय और भजनों के माध्यम से बताया कि निरंकारी मिशन कोई सीमित विचारधारा नहीं, बल्कि वह चेतना है जो कहती है —

“हम सब एक हैं, और परमात्मा हम सभी में है।”

इस आयोजन ने साफ कर दिया कि भविष्य उन्हीं हाथों में सुरक्षित है, जिनमें श्रद्धा की कूंची और सेवा का रंग है।

कार्यक्रम के अंत में मसूरी ज़ोन के श्री हरभजन सिंह जी और स्थानीय संयोजक श्री नरेश विरमानी जी ने समागम में पधारे सभी भक्तों, बच्चों और अभिभावकों का आभार प्रकट करते हुए कहा —

“आज बच्चों ने जो सिखाया, वह किसी किताब में नहीं मिलेगा — यह आत्मा से आत्मा तक पहुँचा संदेश था।”

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