चश्मे से जूते तक… और अब JEE Main में भी हूबहू! कुदरत का करिश्मा या मेहनत का कमाल

भुवनेश्वर। भुवनेश्वर से सामने आई यह खबर इस समय देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां रहने वाले जुड़वां भाई मसरूर खान और महरूप खान ने JEE Main 2026 में ऐसा इतिहास रच दिया, जिसने न सिर्फ छात्रों बल्कि शिक्षा विशेषज्ञों और परीक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है।

300 अंकों की इस अत्यंत कठिन परीक्षा में दोनों भाइयों को बिल्कुल समान अंक प्राप्त हुए। आमतौर पर जुड़वां बच्चों की शक्ल, आवाज़ या आदतों का मिलना तो समझ आता है, लेकिन देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में एक जैसे नंबर आना बेहद दुर्लभ माना जा रहा है।

  • दोनों भाइयों में समानता सिर्फ शक्ल तक सीमित नहीं है।
  • दोनों का चश्मे का नंबर एक जैसा है
  • जूते का साइज भी समान है
  • पढ़ाई का समय, विषयों की प्राथमिकता और रिवीजन की रणनीति तक एक जैसी

यही वजह है कि जब रिजल्ट सामने आया, तो परिवार के साथ-साथ कोचिंग संस्थान और दोस्त भी सन्न रह गए।

इस अनोखे संयोग ने National Testing Agency और शिक्षा विशेषज्ञों का भी ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि जुड़वां बच्चों के मानसिक तालमेल और एक जैसी तैयारी का नतीजा भी हो सकता है।

भुवनेश्वर से देशभर में चर्चा

भुवनेश्वर से निकली यह कहानी अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इसे कुदरत का करिश्मा बता रहे हैं, तो कुछ इसे अनुशासन, मेहनत और एक जैसी सोच का परिणाम मान रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने बड़े स्तर की परीक्षा में इस तरह की समानता बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है

क्या यह सिर्फ इत्तेफाक है, या फिर जुड़वां होने का असर दिमागी स्तर तक इतना गहरा होता है?जो भी हो, मसरूर और महरूप खान की यह उपलब्धि लाखों JEE अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा और आश्चर्य दोनों बन गई है।

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