एनएच-07 परियोजना से देहरादून को जाम से राहत, यात्रा समय 2 घंटे से घटकर 35 मिनट

देहरादून। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण पांवटा साहिब–बल्लूपुर कॉरिडोर पर यातायात की वर्षों पुरानी समस्या अब समाप्ति की ओर है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा एनएच-07 के अंतर्गत विकसित की जा रही पांवटा साहिब–बल्लूपुर चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, सड़क सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिहाज से एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रही है।
यातायात दबाव और सुरक्षा चुनौतियों का स्थायी समाधान
पांवटा साहिब–देहरादून मार्ग पर प्रतिदिन हजारों यात्री, औद्योगिक और वाणिज्यिक वाहन गुजरते हैं। सीमित सड़क चौड़ाई, तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और रिबन डेवलपमेंट के कारण यह मार्ग लंबे समय से जाम और दुर्घटनाओं का केंद्र बना हुआ था। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए एनएचएआई ने इस कॉरिडोर को चार लेन में विकसित करने का निर्णय लिया।

44.8 किमी लंबा फोरलेन हाईवे, 7 किमी दूरी होगी कम
एनएच-07 के अंतर्गत 44.800 किलोमीटर लंबे इस खंड का चार-लेनीकरण किया जा रहा है, जो हिमाचल के पांवटा साहिब से लेकर देहरादून के बल्लूपुर चौक तक फैला है।
परियोजना में करीब 25 किलोमीटर ग्रीनफील्ड बायपास शामिल है, जिससे हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुधोवाला जैसे भीड़भाड़ वाले कस्बों से यातायात हटेगा। इससे मार्ग की कुल लंबाई में लगभग 7 किलोमीटर की कमी आएगी और ईंधन व समय दोनों की बचत होगी।
दिल्ली–देहरादून इकोनोमिक कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव
यह परियोजना दिल्ली–देहरादून इकोनोमिक कॉरिडोर से भी एकीकृत की जा रही है। इसके पूरा होने से देहरादून शहर में प्रवेश करने वाला थ्रू-ट्रैफिक वैकल्पिक मार्ग से गुजरेगा, जिससे राजधानी को जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
निर्माण में कुल लागत ₹1,646 करोड़

परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मोड (HAM) पर दो पैकेजों में पूरा किया जा रहा है—
पैकेज-I (पांवटा साहिब–मेदनीपुर | 18.7 किमी)
लागत: ₹553.21 करोड़
प्रमुख उपलब्धि: 1,175 मीटर लंबा चार लेन यमुना नदी पुल
पैकेज-II (मेदनीपुर–बल्लूपुर, देहरादून | 26.1 किमी)
लागत: ₹1,093 करोड़
इसमें अंडरपास, सर्विस रोड और शहरी बायपास शामिल
परियोजना से कुल 25 गांव प्रभावित हैं, जिनमें 21 उत्तराखंड और 4 हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं।
31.5 किमी हिस्से पर यातायात शुरू, फरवरी 2026 तक पूर्णता का लक्ष्य
परियोजना के अंतर्गत सभी प्रमुख पुल और संरचनात्मक कार्य पूरे हो चुके हैं।
31.50 किलोमीटर तैयार खंड पर वाणिज्यिक यातायात शुरू कर दिया गया है, जबकि शेष हिस्सों में अंतिम पेवमेंट और आरई वॉल का कार्य प्रगति पर है। फरवरी 2026 तक पूरे कॉरिडोर को पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है।
आधुनिक इंजीनियरिंग और हाई-टेक सड़क सुरक्षा
फोरलेन हाईवे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। प्रमुख विशेषताएं—
1,175 मीटर यमुना नदी पुल व 105 मीटर आसन नदी पुल
थ्री-बीम क्रैश बैरियर और एंटी-ग्लेयर स्क्रीन
24×7 निगरानी के लिए PTZ कैमरे
आधुनिक साइनएज, रोड मार्किंग और लाइटिंग
टेंसर तकनीक से बिटुमिन की खपत में कमी
ढलान सुरक्षा व व्यापक पौधारोपण
आम जनता को मिलेगा बड़ा लाभ

परियोजना पूरी होने के बाद—
पांवटा साहिब से देहरादून का सफर 35 मिनट में
देहरादून को ट्रैफिक जाम से राहत
पर्यटन, उद्योग और रोजगार को बढ़ावा
चारधाम यात्रा, विशेषकर यमुनोत्री के लिए बेहतर पहुंच
भविष्य में देहरादून–मसूरी कनेक्टिविटी से भी जुड़ाव
क्षेत्रीय विकास की दिशा में बड़ी उपलब्धि
एनएचएआई का कहना है कि पांवटा साहिब–बल्लूपुर चार लेन परियोजना केवल एक सड़क नहीं, बल्कि सुरक्षित, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख अवसंरचना का उदाहरण है। यह कॉरिडोर आने वाले वर्षों में उत्तराखंड और हिमाचल के आर्थिक व सामाजिक विकास को नई गति देगा।

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