धराली आपदा: मुख्यमंत्री ने दिया एक माह का वेतन, IAS अफसरों ने भी बढ़ाया सहयोग का हाथ

देहरादून। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में स्थित धराली और हर्षिल क्षेत्रों में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। बादल फटने और अचानक आई बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कई घर बह गए, सड़कों का नामोनिशान मिट गया और जन-धन की हानि हुई है। इस भीषण आपदा के बाद से राज्य सरकार द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है।

आपदा प्रभावित से मिलते सीएम धामी

 

मुख्यमंत्री धामी ने आपदा प्रभावितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अपने एक माह का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी गंभीरता से हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह समय एकजुटता दिखाने का है और सभी को मानवीय भावना के साथ आगे आकर सहयोग करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संकट की घड़ी में अपनी-अपनी क्षमतानुसार राहत एवं पुनर्वास कार्यों में हाथ बंटाएं।

इसी क्रम में, उत्तराखंड आई.ए.एस. एसोसिएशन की एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री एल.ए. फैनई ने की। इस बैठक में 5 अगस्त को धराली क्षेत्र में आई आपदा और उससे उत्पन्न चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में राज्य के सभी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों द्वारा स्वेच्छा से एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया।

सचिव श्री दिलीप जावलकर ने बताया कि यह निर्णय एसोसिएशन के सदस्यों की मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं है, बल्कि उन तमाम राहत और बचाव कर्मियों, डॉक्टरों, सुरक्षाबलों और स्वयंसेवकों के साथ एकजुटता की भावना भी है, जो रात-दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा में जुटे हुए हैं।”

उन्होंने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा संचालित बहु-एजेंसी आपदा प्रबंधन प्रयासों को और सशक्त बनाना है ताकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और बुनियादी व्यवस्थाओं की बहाली में तेजी लाई जा सके।

एसोसिएशन ने सभी अधिकारियों से अपील की कि वे व्यक्तिगत स्तर पर भी इस आपदा में सहयोग और संवेदना दिखाएं। यह पहल प्रशासनिक सेवा की उस मूल भावना को मजबूत करती है जिसमें जनहित सर्वोपरि होता है।

इस बीच राहत एवं बचाव कार्यों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग सहित कई एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं। हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है और अब तक दर्जनों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है। प्रभावित गांवों में तात्कालिक शिविर स्थापित कर भोजन, दवा और सुरक्षित आवास की व्यवस्था की जा रही है।

आपदा से हुए नुकसान का आकलन भी तेजी से किया जा रहा है और सरकार ने प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।

यह आपदा जहां राज्य के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर आई है, वहीं सरकार, प्रशासन और समाज की एकजुटता ने यह संकेत भी दिया है कि उत्तराखंड हर संकट का सामना सामूहिक शक्ति से करने में सक्षम है.

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