- जनस्वास्थ्य के हित में सरकार का फैसला, एक साल तक लागू रहेगी रोक
- गुटखा, तंबाकू और निकोटिन युक्त खाद्य उत्पादों पर कार्रवाई
- निर्माण से बिक्री तक प्रतिबंध, खाद्य सुरक्षा विभाग करेगा निगरानी
- आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने जारी किया आदेश, कारोबारियों को करना होगा पालन
- युवाओं को तंबाकू की लत से बचाने और लोगों की सेहत सुरक्षित रखने पर जोर
देहरादून। लोगों की सेहत और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने गुटखा, तंबाकू युक्त पान मसाला और निकोटिन युक्त खाद्य पदार्थों पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। इसके तहत प्रतिबंध के दायरे में आने वाले उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक रहेगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य तंबाकू सेवन से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को कम करना और लोगों को गंभीर बीमारियों के खतरे से बचाना है।
गुटखा और तंबाकू का सेवन आज भी समाज के सामने एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। कई लोग इन उत्पादों को रोजमर्रा की आदत बना लेते हैं और धीरे-धीरे इसकी लत के शिकार हो जाते हैं। इसका नुकसान केवल सेवन करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति और मानसिक चिंता पर भी असर पड़ सकता है। गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार के लिए अतिरिक्त बोझ बन जाता है। ऐसे में तंबाकू युक्त उत्पादों की उपलब्धता पर नियंत्रण को जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
बाजार में नहीं बिक सकेंगे प्रतिबंधित उत्पाद
सरकार की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाले उत्पादों का निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री नहीं की जा सकेगी। इस दायरे में तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला तथा अन्य संबंधित खाद्य पदार्थ शामिल हैं। प्रतिबंध का पालन केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति से जुड़े कारोबारियों को भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
इस फैसले को प्रभावी बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी अहम होगी। बाजारों, दुकानों और गोदामों में प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता की जांच करनी होगी। यदि नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिलती है, तो संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, प्रत्येक उत्पाद पर प्रतिबंध की स्थिति उसकी सामग्री और आदेश के वास्तविक दायरे के आधार पर निर्धारित होगी।
तंबाकू की लत से परिवार भी होते हैं प्रभावित
तंबाकू सेवन का मुद्दा केवल व्यक्तिगत पसंद का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। गुटखा और अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पादों में मौजूद हानिकारक पदार्थ मुंह और शरीर के दूसरे हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक सेवन करने से मुंह के कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। निकोटिन की लत के कारण कई लोगों के लिए इस आदत को छोड़ना भी मुश्किल हो जाता है।
कई परिवारों में तंबाकू पर नियमित खर्च धीरे-धीरे बड़ी राशि बन जाता है। वहीं, बीमारी होने पर उपचार और देखभाल का खर्च अलग से उठाना पड़ता है। परिवार के किसी सदस्य के गंभीर रूप से बीमार पड़ने पर बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और आर्थिक योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए तंबाकू सेवन को रोकने के प्रयासों का महत्व केवल बीमारी से बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

युवाओं को नशे की शुरुआत से बचाने की जरूरत
युवाओं में तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल को रोकना भी इस तरह के प्रतिबंधों का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। कई बार गुटखा या तंबाकू का सेवन दोस्तों की संगत, जिज्ञासा अथवा सामान्य आदत के रूप में शुरू होता है। बाद में यही आदत लत में बदल सकती है। यदि बाजार में ऐसे उत्पादों की उपलब्धता पर प्रभावी नियंत्रण हो और साथ ही जागरूकता अभियान चलाए जाएं, तो युवाओं को इनके नुकसान समझाने में मदद मिल सकती है।
विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर तंबाकू के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देना आवश्यक है। परिवारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बच्चों और युवाओं को डराने या अपमानित करने के बजाय उन्हें वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समझाया जाना चाहिए कि तंबाकू का सेवन किस प्रकार स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।
कानून के तहत जारी किया गया आदेश
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा खाद्य सुरक्षा और मानक (विक्रय प्रतिषेध और निर्बंधन) विनियम, 2011 के प्रावधानों पर आधारित है। अधिनियम की धारा 30 की उपधारा (2) के तहत राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को जनस्वास्थ्य के हित में निर्धारित परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।
आदेश के अनुसार, प्रतिबंध एक साल के लिए लगाया गया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिबंधित श्रेणी के उत्पाद बाजार में उपलब्ध न रहें। तंबाकू युक्त गुटखे और तंबाकू या निकोटिन रहित पान मसाले के बीच कानूनी अंतर को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करना भी जरूरी होगा, ताकि आदेश का पालन सही तरीके से हो सके।
प्रतिबंध के साथ जागरूकता अभियान भी जरूरी
किसी भी प्रतिबंध का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब उसका पालन सुनिश्चित किया जाए। यदि दुकानों पर बिक्री बंद हो जाए, लेकिन दूसरे माध्यमों से प्रतिबंधित उत्पादों की आपूर्ति जारी रहे, तो उद्देश्य पूरा करना कठिन हो सकता है। इसलिए नियमित निरीक्षण, शिकायतों पर कार्रवाई और कारोबारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देना आवश्यक होगा।
इसके साथ ही तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों को परामर्श और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराना भी उपयोगी रहेगा। लत से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे लोगों को सहयोग मिलना चाहिए, ताकि वे दोबारा सेवन की ओर न लौटें।
उत्तराखंड सरकार का यह फैसला जनता के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल को सामने लाता है। अब चुनौती यह है कि प्रतिबंध को कागजों तक सीमित न रहने दिया जाए और बाजार में इसके प्रभावी पालन को सुनिश्चित किया जाए। नियमित निगरानी, जनजागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं के सहयोग से ही इस कदम का लाभ आम लोगों तक पहुंच सकेगा।