देहरादून: अपनी कॉमेडी से करोड़ों दिलों को जीतने वाले अभिनेता राजपाल यादव की कानूनी मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रहीं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई टालते हुए कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। इसके चलते अभिनेता को कम से कम 16 फरवरी तक तिहाड़ जेल में ही रहना होगा।

मामला 2010 में उनकी पहली डायरेक्टोरियल फिल्म अता पता लापता के लिए ली गई राशि से जुड़ा है। शिकायतकर्ता कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स ने 5 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था, जो ब्याज व अन्य दावों के साथ बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। अदालत ने कंपनी को नोटिस भी जारी किया है।
सुनवाई के दौरान यादव के वकीलों ने भुगतान व्यवस्था पर निर्देश लेने के लिए समय मांगा। अभिनेता की ओर से पारिवारिक कारण (शादी में शामिल होने की बात) भी रखी गई, लेकिन अदालत ने इसे राहत का आधार नहीं माना। यादव 5 फरवरी से न्यायिक हिरासत में हैं।
अदालत की टिप्पणी कड़ी रही। न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने कहा कि अभिनेता जेल कोर्ट के आदेश से नहीं, बल्कि अपने ही आचरण के कारण हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि यादव ने कई बार बकाया चुकाने का भरोसा दिया, पर तय समय में भुगतान नहीं किया। इसी आधार पर छह महीने की सज़ा सुनाई गई है।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पहले शिकायतकर्ता को सीधे भुगतान का आश्वासन दिया गया था और अब रकम अदालत में जमा करने की बात कही जा रही है। मामले के अदालत में पहुंचने के बाद फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति से जुड़े कुछ लोगों द्वारा आर्थिक मदद की पेशकश की खबरें भी सामने आई हैं—हालांकि, अदालत के सामने निर्णायक कसौटी अब भी वास्तविक भुगतान ही है।
निष्कर्ष: अदालत का संदेश साफ है—लगातार वादाखिलाफी और देनदारी स्वीकार करने के बाद भी भुगतान न होना, राहत का आधार नहीं बन सकता। आगे की सुनवाई में अगर बकाया राशि जमा होती है, तभी स्थिति बदल सकती है।

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