नीट लीक: मेहनत की हत्या, सिस्टम की नाकामी और करोड़ों के खेल का पर्दाफाश

देहरादून. देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट एक बार फिर सवालों के कटघरे में है। प्रश्नपत्र लीक की पुष्टि होते ही यह साफ हो गया है कि यह सिर्फ एक परीक्षा घोटाला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर सुनियोजित हमला है। लाखों छात्रों की रातों की नींद और सालों की मेहनत को चंद दलालों ने पैसों के तराजू पर तौल दिया।

जांच में सामने आ रहा है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र बाजार में बिक चुका था। मोटी रकम लेकर “सेटिंग” के जरिए चयन तय किया जा रहा था। यह पूरा खेल बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा। सवाल सीधा है—जब प्रश्नपत्र स्ट्रॉन्ग रूम में होते हैं, तो बाहर कैसे पहुंच जाते हैं?

परीक्षा कराने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। बार-बार लीक, बार-बार सफाई—लेकिन जवाबदेही शून्य। क्या एजेंसी छात्रों को सुरक्षा दे पाने में पूरी तरह विफल हो चुकी है?

सूत्रों के मुताबिक, मामला अब सिर्फ दलालों तक सीमित नहीं है। कोचिंग नेटवर्क, डिजिटल भुगतान और अंदरूनी सूत्रों की भूमिका की परतें खुल रही हैं। ऐसे में केस को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने की मांग तेज हो गई है, ताकि इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचा जा सके।

देशभर में छात्र सड़कों पर हैं। परीक्षा रद्द करने और दोबारा कराने की मांग जोर पकड़ चुकी है। छात्रों का कहना है कि अगर दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिस्टम हर साल ईमानदार छात्रों को कुचलता रहेगा। कई अभ्यर्थी अब न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।

नीट लीक ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर सिस्टम में सख्ती नहीं आई, तो काबिलियत नहीं, बल्कि पैसा डॉक्टर बनाएगा। सवाल अब सिर्फ लीक का नहीं, बल्कि देश के भविष्य का है—क्या दोषियों पर गिरेगी गाज, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?

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